Monday, 25 March 2019

वो चली गई

आज भी जब उस खिड़की को देखता हूँ तो
लगता है जैसे चिढ़ा रही हो
देख के बता कितना देख सकता है मुझे उसके बिना।
उनके एक दीदार के लिए हम बुत बनके खड़े रहे घड़ियों तक
और वो आये पंछी की तरह हमारे ऊपर बीट करके निकल लिए।
आज
उसकी गली से जाना हुआ, बिल्कुल भी नही चहक रही थी
मालुम हुआ जिससे गली चहकती थी, किसी दूसरे शहर की गली चली गई।
Hindi shayari wala, hindi Shayari wo chali hayi

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